भाईयो और बहनों हम में से कितने ही ऐसे असंख्य लोग हैं जो मांस को बड़े ही चाव से खाते हैं। वैसे तो मांसाहार के विषय में हिन्दू धार्मिक पुस्तकों में विभिन्न मत हैं। वैष्णव मार्ग को अपनाने वाले कभी भी जीव हत्या और मांसाहार का समर्थन नहीं करते जबकि शैवश मार्ग का पालन करने वाले मांसाहार को वर्जित नहीं मानते। परन्तु मेरा ऐसा मानना है कि हमको किसीको क्या खाना है और क्या नहीं इसका निर्धारण करने का कोई अधिकार नहीं है। परन्तु मैं जीव हत्या का कभी समर्थन नहीं करता।
अब आते हैं हमारे मुख्य शीर्षक पर, मांस बाज़ार का मुद्दा इस समय उठाना अति आवश्यक है क्योंकि इस विश्व में बहुत सी महामारियों का जन्म मांस बाजारों से ही हुआ है। अभी तक के सूत्रों से पता चला है कि हाल ही में पैदे हुए महासंकट का कारण चीन का हुनान सीफूड मार्केट है जहां ना केवल सामान्य पशुओं का मांस बिकता है अपितु सभी जंगली जानवर को मार कर उनका मांस बेचा जाता है। चमगादड़, सांप, चूहों और अन्य ऐसे ही ना जाने कितने जानवर हैं जिनके अंदर कई प्रकार के वायरस पाए जाते हैं, उनको खाने के लिए एक ऐसी संस्कृति बनाई गई जिसमें आम लोगों के बीच यह प्रचारित और प्रसारित किया गया कि जंगली जानवरों को खाने से शरीर को अधिक ऊर्जा और ताकत मिलती है। यही नहीं चीन के बड़े बड़े रेसटोरेंट्स और होटल्स में इन जंगली जानवरों की डिश बना कर इसकी ऐसी सुंदर छवि बनाई गई जिसके कारण आम लोगों के मन में इन सभी से बने व्यंजनों को खाने की उत्सुकता जागी।
जब सार्स महामारी ने अपना पूर्ण रूप दिखाया तब चीन ने अपने मुख्य मांस बाज़ार हुनान सीफूड मार्केट को बंद करने का निर्णय लिया था। परन्तु कुछ समय बाद वापस से इसको आम जनता के लिए खोल दिया गया। एक बार फिर महामारी ने किसी और नाम से अपना रूप दिखाना प्रारम्भ किया है तो वापस से इस मांस बाज़ार को बंद करने का निर्णय किया गया है। परन्तु अब यह देखने लायक होगा की यह पाबंदी कब तक रहती है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार यह बाज़ार हमेशा के लिए बंद हो चुका है।
प्रत्येक राष्ट्र अपने स्वयं के खाद्य कानूनों और मानकों को बनाने के लिए स्वतंत्र है। इस लेख का उद्देश्य चीन के खाद्य मानकों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर कुछ ध्यान केंद्रित करना है जो वैश्विक खाद्य मानकों का सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानकों को स्थपित करने में खाद्य और कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) मुख्य हैं।
मार्च 2019 में FAO की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में वैश्विक मांस उत्पादन 336.4 मिलियन अनुमानित है और दुनिया के सबसे बडा मांस आयातक देश चीन है। चीन अपनी इस आयातक क्षमता को प्रति वर्ष बढ़ा रहा है जो चीन की उपभोक्ता क्षमता को भी दर्शाता है।
अगर वैश्विक संस्थान मांसाहार के लिए एक सामान्य दिशा निर्देश जारी कर दे कि किस जानवर को मांसाहार के लिए उपयोग में लाया जाए और किसको नहीं, मांस के बिकने की जगह पर किस स्तर की साफ सफाई हो, तो यह भी आने वाली बीमारियों और महामारियों की रोकथाम के लिए कारगर साबित होंगा।
समय आ गया है कि अब हम इस मुद्दे को ध्यान से सोचे समझे और मांसाहार के लिए भी मानकों को बना कर उनका पालन करे।
अपने और अपनों का ध्यान रखें।
अब आते हैं हमारे मुख्य शीर्षक पर, मांस बाज़ार का मुद्दा इस समय उठाना अति आवश्यक है क्योंकि इस विश्व में बहुत सी महामारियों का जन्म मांस बाजारों से ही हुआ है। अभी तक के सूत्रों से पता चला है कि हाल ही में पैदे हुए महासंकट का कारण चीन का हुनान सीफूड मार्केट है जहां ना केवल सामान्य पशुओं का मांस बिकता है अपितु सभी जंगली जानवर को मार कर उनका मांस बेचा जाता है। चमगादड़, सांप, चूहों और अन्य ऐसे ही ना जाने कितने जानवर हैं जिनके अंदर कई प्रकार के वायरस पाए जाते हैं, उनको खाने के लिए एक ऐसी संस्कृति बनाई गई जिसमें आम लोगों के बीच यह प्रचारित और प्रसारित किया गया कि जंगली जानवरों को खाने से शरीर को अधिक ऊर्जा और ताकत मिलती है। यही नहीं चीन के बड़े बड़े रेसटोरेंट्स और होटल्स में इन जंगली जानवरों की डिश बना कर इसकी ऐसी सुंदर छवि बनाई गई जिसके कारण आम लोगों के मन में इन सभी से बने व्यंजनों को खाने की उत्सुकता जागी।
जब सार्स महामारी ने अपना पूर्ण रूप दिखाया तब चीन ने अपने मुख्य मांस बाज़ार हुनान सीफूड मार्केट को बंद करने का निर्णय लिया था। परन्तु कुछ समय बाद वापस से इसको आम जनता के लिए खोल दिया गया। एक बार फिर महामारी ने किसी और नाम से अपना रूप दिखाना प्रारम्भ किया है तो वापस से इस मांस बाज़ार को बंद करने का निर्णय किया गया है। परन्तु अब यह देखने लायक होगा की यह पाबंदी कब तक रहती है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार यह बाज़ार हमेशा के लिए बंद हो चुका है।
प्रत्येक राष्ट्र अपने स्वयं के खाद्य कानूनों और मानकों को बनाने के लिए स्वतंत्र है। इस लेख का उद्देश्य चीन के खाद्य मानकों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर कुछ ध्यान केंद्रित करना है जो वैश्विक खाद्य मानकों का सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानकों को स्थपित करने में खाद्य और कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) मुख्य हैं।
मार्च 2019 में FAO की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में वैश्विक मांस उत्पादन 336.4 मिलियन अनुमानित है और दुनिया के सबसे बडा मांस आयातक देश चीन है। चीन अपनी इस आयातक क्षमता को प्रति वर्ष बढ़ा रहा है जो चीन की उपभोक्ता क्षमता को भी दर्शाता है।
अगर वैश्विक संस्थान मांसाहार के लिए एक सामान्य दिशा निर्देश जारी कर दे कि किस जानवर को मांसाहार के लिए उपयोग में लाया जाए और किसको नहीं, मांस के बिकने की जगह पर किस स्तर की साफ सफाई हो, तो यह भी आने वाली बीमारियों और महामारियों की रोकथाम के लिए कारगर साबित होंगा।
समय आ गया है कि अब हम इस मुद्दे को ध्यान से सोचे समझे और मांसाहार के लिए भी मानकों को बना कर उनका पालन करे।
अपने और अपनों का ध्यान रखें।

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